हम में से कई लोग दिन-प्रतिदिन जीवन के साथ संघर्ष करते हैं।
जहाँ हममें से कुछ लोग अपने सपनों को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, वहीं हममें से कुछ अपने संघर्षपूर्ण क्षणों से गुजरने की हिम्मत जुटाने की कोशिश करते हैं।
उन मुश्किल पलों में हम अपनी हिम्मत बनाए रखते हैं!
पर कभी-कभी, हम नकारात्मक विचारों के शिकार हो जाते हैं और अपना आत्मविश्वास खोना शुरू कर देते हैं।
यदि आप उन लोगों में से हैं जो कठिन जीवन की स्थिति से जूझ रहे हैं, तो यह पोस्ट आपको वह पॉज़िटिव एनर्जी दे सकती है जिसकी आपको तलाश थी।
हाल ही में बॉलीवुड के प्रमुख सितारों में से एक, आयुष्मान खुराना को 66 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से नवाज़ा गया।
2018 में, उन्होंने साल के दो सबसे बड़े ब्लॉकबस्टर – अंधाधुन और बधाई हो – में बहतरीन काम किया। इसलिए, जब उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता, तो हममें से कई ने उनकी उपलब्धियों की सराहना की।
लेकिन, आयुष्मान के लिएजीवन हमेशा आसान नहीं रहा।
पिछले 15 वर्षों में, आयुष्मान ने बहुत संघर्ष किया है। उन्होंने कुछ बेकार फिल्में भी करी हैं । लेकिन, उन्होंने अपनी परिस्थितियों से हार नहीं मानी । और, यह हाल के दिनों में ही था, जब उनकी कड़ी मेहनत को सराहना मिलना शुरू हुई।
अपनी कठिन प्रेरणादायी यात्रा को याद करते हुए, आयुष्मान ने एक खूबसूरत कविता लिखी। इस कविता में उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में बात की है जो किसी को भी प्रेरणा दे सकती है –
-1-
जब पहली दफा आया था मुंबई
तब भी हो रही थी बारिश।
आज भी बरखा बहार है।
-2-
यहाँ की भीड़ की तरह सपने थे
आँखों में हज़ार,
आज भी उमंगे तेज़ तर्रार है।
-3-
माँ बाप ने नम आँखों
से दी थी मुझे परवाज़ ,
आज भी उनकी फिक्र बरकरार है।
-4-
सेकंड (second) क्लास स्लीपर पे आया था इस
शहर में दोस्तों के साथ,
आज भी उसी सफ़र का खुमार है।
-5-
उठ कर गिरा, गिर कर उठा, चला, उड़ा,
आज उन्ही ठोकरों की ख़ातिर मेरे हक़
में राष्ट्रीय पुरस्कार है।
असली अचीवेर कभी भी अपनी असफलताओं को दोष नहीं देते। बल्कि वे अपने सपनों को हासिल करने के लिए उन संघर्षों और असफलताओं में ताकत ढूंढ लेते हैं।
हमें उम्मीद है आयुष्मान की तरह, आप भी अपने जीवन संघर्ष में सफल होंगे! और तब तक, हम उम्मीद करते हैं की आप हार नहीं मानेंग़े!